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Vision

“एक परिवार एक गौमाता”

कोरोना के इस महामारी युग में हम सभी को यह समझ आया है कि भारतीय खान-पान, आचरण-व्यवहार, रहन-सहन, स्वास्थ्य, संस्कृति सभी क्षेत्र में हम भारतीय पद्धतियों के कारण ही सुरक्षित हैं | 

भारतीय जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण अंग है – ‘गौ माता’ । प्राचीन काल में प्रत्येक घर में गौमाता के लिए एक स्थान अवश्य होता था, परन्तु आज नहीं है । प्राचीन व्यवस्था को हम स्वीकार करते है, समझते है यह भी हमारे लिए कम सौभाग्य की बात नहीं है | 

हम समझते है कि भारतीय गौवंश हमारे लिए एक वरदान है, जीवन का प्रत्येक भाग गौ माता से संबंधित है, चाहें वो धर्मशास्त्र हों, अर्थशास्त्र हों, कृषिशास्त्र हों, समाजशास्त्र हों, आरोग्यशास्त्र हों, पर्यावरणशास्त्र हों या अध्यात्मशास्त्र हों, सभी से गौ माता बहुत गहराई से जुड़ी हैं । इसके अनेकानेक उदाहरण हमें देश के किसी न किसी कोने में देखने को मिलते है ।    

गौ माता हमारे लिए वरदान है, तो क्या हम इस वरदान को यह मानकर चलें कि हम कुछ करें या ना करें, यह वरदान तो हमारे ऊपर बना ही रहेगा | यह हमारी सबसे बड़ी भूल है । 

इस भूल को सुधारने का अभी भी एक मौका है, यदि भारतीय गोवंश के वरदान को सुरक्षित रखना है तो हमे प्राचीन युगों पुरानी जीवन पद्धति को अपनाना होगा । 

साधारणतया पंचगव्य की हमें जानकारी है और कभी न कभी हम इसे किसी न किसी स्वरूप में या तो उपयोग किये है या कर रहे है | हमारी अज्ञानता के कारण गौ माता का हमसे व्यक्तिगत संपर्क नहीं हो पाता, एक भावनात्मक लगाव नहीं हो पाता जिसके कारण गौ माता की शक्ति (पंचगव्य) का उपयोग हम अपनी आवश्यकता (शारीरिक) के अनुरूप नहीं कर पाते और वैज्ञानिक सिद्धांतों पर रखने का प्रयास करते है तो कभी कभी परिणाम भिन्न प्राप्त होता है, यह हमारी असफलता ही नहीं गौ माता का अपमान भी है | 

गौ माता के वरदान को संभालने का व्यक्तिनिष्ठ प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण तो है ही किन्तु वह चिरस्थायी नहीं है । इसलिए समर्थ गौ संवर्धन एवं अनुसंधान केंद्र एक ऐसा वातावरण बनाने के लिए प्रयासरत है जो समाजनिष्ठ व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत करें | 

समर्थ गौ संवर्धन एवं अनुसंधान केन्द्र, समर्थ ट्रस्ट द्वारा संचालित उपक्रम किसी नई गौशाला का प्रारूप नहीं है, अपितु यह भारतीय गौवंश के वरदान को भविष्य के लिये सुरक्षित रखने का वातावरण बनाने का एक अभियान है

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